April 25, 2015

जीवन मेँ कर्म की भूमिका


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 जीवन (Jeewan) मेँ कर्म की भूमिका मुख्य है क्योकि इसके बिना जीवन का कोई अर्थ ही नहीँ रह जाता है। कर्म ही वह साधन है जिसे करके मनुष्य जीवन पथ पर आगे बढ़ता है और एक लक्ष्य जिसे उसने सिर्फ सोच रखा है, प्राप्त कर पाता है। अर्थात् कर्म हमारी सोच या सपने को मूर्त रूप देते है। इसका एक तात्पर्य यह भी है कि सपने और कर्म का आपस मेँ गहरा संबध है।

 विघार्थी जीवन की ही बात की जाए तो प्रत्येक क्षेत्र मेँ अध्ययनरत विघार्थी का कोई लक्ष्य होता है जिसे वह कर्म करके ही प्राप्त कर पाता है इसके बाद आगे का जीवन भी वह कर्म करके ही बिता पाता है अर्थात् जितने श्रेष्ठ हमारे कर्म होँगे उतना ही श्रेष्ठ हमारा जीवन होगा। इस प्रकार कर्म से ही जीवन मेँ श्रेष्ठता आती है और जीवन मेँ कर्म की मुख्य भूमिका है।

26 comments:

Sanju said...

Very nice post ...
Blog decoration is also very nice.

Kailash Sharma said...

जीवन में कर्म ही सफलता की सीढ़ी है...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

Digamber Naswa said...

कर्म ही जीवन है ये रहस्य यदि जान में तो जीवन सफल है ...

Shanti Garg said...

बहुत ही उम्दा और प्रेरक पोस्ट है तथा ब्लॉग सज्जा भी उत्तम है।

स्वप्न मञ्जूषा said...

मानव जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू है उसकी कर्मशीलता।
कहा भी गया है 'सकल पदारथ एहि जग माही, कर्महीन नर पावत नाही'
माथे से बहते पसीने में करोड़ों गंगाओं का पुण्य समाया रहता है।
इसीलिए तो अंग्रेजी में भी कहते हैं 'work is worship.'

स्वप्न मञ्जूषा said...

प्रेरणा मिली है पोस्ट पढ़ कर, धन्यवाद।

JEEWANTIPS said...

बहुत बहुत धन्यवाद
मंजूषा जी

shashi purwar said...

sundar vichar karm hi jeevan hai

Neha said...

कर्म से भाग्य बदले जा सकते हैं,तभी तो शायद गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है,"कर्म किये जा फल की चिंता मत कर"

हिमकर श्याम said...

कर्म ही किस्मत की दशा और दिशा तय करते हैं...सुंदर और प्रेरक पस्तुति

वीरेन्द्र सिंह said...

सही लिखा है आपने। बढ़िया ब्लॉग। कर्महीन नर पावत नाहीं। सहमत हूं आपसे।

jafar said...

Very imspiring....thanks

ज्योति-कलश said...

सार्थक चिंतन ..सुन्दर प्रस्तुति !

बहुत आभार !!

KAHKASHAN KHAN said...

बहुत ही अच्‍छा लेख। सच कहा कि कर्म ही हमारा भाग्‍य तए करते हैं। इसलिए लोगों को भाग्‍यवादी बनने के बजाए, कर्मवादी बनना चाहिए।

Virendra Kumar Sharma said...

कर्म प्रधान विश्व रची राखा ,

जो जैसी करि ,सो फलि चाखा।

कर्म हमारा भाग्य लिखते हैं।

JEEWANTIPS said...

बहुत आभार !!

संध्या शर्मा said...

सुन्दर, सार्थक चिंतन … शुभकामनाएं

संजय भास्‍कर said...

सुंदर और प्रेरक पस्तुति

Mukesh Kumar Sinha said...

sundar prastuti.....

JEEWANTIPS said...

बहुत आभार !!

Sanju said...

Very nice post ...
Welcome to my blog on my new post.

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

कर्म सर्वोपरि है, पर भाग्य को भी नकारा नहीं जा सकता। अनेकाधिक बार यह सच सामने आया है।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

Pl. arrange to remove "Comment moderation." It will beneficiary to all.

Madhulika Patel said...

apne sapne poore karna ya bhagya badalna ho,hume karm ke bina kuch bhe nahi milega..bahut accha lekh hai

JEEWANTIPS said...

Madhulika ji,
Apke bahumulya comment ke liye thanks.

JEEWANTIPS said...

सभी टिप्पणीकर्ताओँ को ब्लॉग पर आने और अपने अमूल्य विचार व्यक्त करने के लिए धन्यवाद!
JEEWANTIPS